दुनिआ के कई देशों के लोग पुडिंग से लेकर अन्य खाद्य आइटमों में फलैक्स सीड का खुब इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें अत्यंत गुणकारी एन-3 फैट (वसा) की अधिकायत है। एन-3 फैट का लगातार सेवन डायबिटीज, हृदयघात एवं स्ट्रोक से भी बचाव करने में समर्थ है। मेरे लिए फ्लैक्स सीड तिलिस्म की चीज हो गयी। वस्तुतः उस समय फ्लैक्स सीड का हिंदी मुझे मालूम नहीं था।

शब्दकोश में जब इसका अर्थ देखा तो पता चला कि फ्लैक्स सीड तीसी को कहते हैं। तीसी के छोटे- छोटे काले दानों की इतनी महत्ता हो सकती है, एकबारगी तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। बचपन में घर में तीसी का तेल दिवाली की समय दिया जलाने में प्रयुक्त होता था। एक अजीब सी गंध और छुने में चपचपाहट को लेकर तीसी से मुझे नफरत सी थी। मगर देहातों में तीसी के दोनों को भूनकर कई लोगों को मैन खाते देखा था। मेरी मां जब भी गांव जाती तीसी जरूर लाती थी और रोज कई तरह से खाने में इसका इस्तेमाल करत थी। मुझे लगता था कि एक तरह की यह बेवकूफी है क्योंकि तीसी न तो देखने में अच्छा लगता है न खाने में।

हमारे बुजुर्ग सदियों से इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। इसका विजडम तो मेरे सामने तब खुला जब यह मालूम हुआ कि यही फ्लैक्स सीड है। फ्लैक्स सीड सुनने में कितना स्मार्ट लगता है और तीसी भोदूं। तीसी एक अतीत की दम तोड़ती कहानी प्रतीत होती है। और फ्लैक्स सीड कोई लेटेस्ट एलबम। मगर शायद यह हमारी मानसिकता का दोष है। तीसी झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाको में भी उपजाया जाता है। इसके तेल को लीनसीड आयल कहते हैं, इसका प्रयोग खाद्य सामग्री को पकाने में नही किया जाता।

स्वास्थ्य के लिए तीसी बीज का पूरा प्रयोग अत्यंत गुणकारी है। इसमें आमेगा 3 फैटी एसिड है जिसे विज्ञान में आज फैट आफ ग्रेटेस्ट इंटरेस्ट कहा जाता है। इससे खतरनाक कोलेस्ट्रारॉल एलडीएल घटता है और इस तरह शरीर में थक्के बनने की संभावना कम रहती है। तीसी में हाई क्वालिटी का प्रोटीन भी है। इसमें फाइवर भी है जो आंतों को गति देता है और कब्ज को दूर करता है। इसमें विटामिन बी -1, बी-2, सी, ई एवं कैरोटीन के अलावा आइरन, जिंक, पोटाशियम, मैगनिशियम, फॉसफोरस एवं कैलशियम भी मिलता है। ये सभी गुणकारी पोषक तत्व है। इसमें एक लिगनिन नामक तत्व भी होता है जो कैंसर जैसी बीमारी से रक्षा करने में समर्थ है। तीसी में एंटी ट्यूमर, एंटी बैक्टीरीयल एवं एंटी फंगल गुण भी है। तीसी का लिगानीन शरीर में उत्पन्न अतिरिक्त इस्टेराजोन को बाहर निकाल कर स्तन कैंसर से महिलाओं को बचाता हैं।

तीसी का इस्तेमाल करन के लिए अच्छा होगा कि इसका चूर्ण बना ले और सलाद के ऊपर छिड़क कर खाएं, पूरा चबा कर भी खा सकते हैं। इसको आटा में मिलाकर भी खा सकते हैं। मेरी मानिए तो बिना दो चम्मच तीसी खाए घर से निकलिए ही मत। यह आपके हृदय को स्वस्थ्य रखेगा। आंतों को गति देगा। शरीर की इम्युनिटी को बढ़ायेगा। मस्तिष्क को शांति देगा। शरीर में रौनक लाएगा और मोटापा भी कम करेगा। डायबिटीज के मरीजों का ब्लड सुगर यह स्टैबलाइज करेगा। तीसी शब्द सुनने में भोंदू भले लगे, यह है चमत्कारी। यदि आपको तीसी से आपत्ति हो तो फ्लैक्स सीड का ही इस्तेमाल कीजिए। चीज एक ही है। नए जमाने में कमीज देहाती जैसा लगता है और शर्ट आधुनिक….

तीसी खाएं डायबिटीज से बचें

तीसी यानी फ्लेक्स सीड के गुणों पर आधुनिक मेडिकल साइंस द्वारा कई शोध किये गये हैं। अभी हाल में सैन डियागो, अमेरिका में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन का वार्षिक सम्मेलन हुया। 24 जून, 2011 को सम्मेलन में डा एनड्रिया की टीम द्वारा प्रस्तुत शोध में यह बताया गया कि यदि प्रतिदिन 20 ग्राम तीसी खायी जाये, तो यह डायबिटीज होने की संभावना को रोक सकती है। य़दि आपका फास्टिंग ब्लड सुगर 100 से 125 मिली ग्राम एवं खाने के दो घंटे बाद का 140 से 200 मिलीग्राम के बीच रहता है, तो आपको डायबिटीज होने की ज्यादा संभावना रहती है। इस अवस्था को प्री डायबिटीज की अवस्था डायबिटीज के दुष्परिणामों के होने की संभावना में उतनी ही खतरनाक है, जितनी की डायबिटीज की अवस्था में यदि आपकी मौजूदा लाइफ स्टाइल में रोज 20 गराम तीसी खाने की आदत जोड़ दी जाये। तो ब्लड सुगर नियंत्रित होने लगता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। यह खुलासा डा एनड्रिया की टीम ने अमेरिका में हुए नये शोध में किया है।

पुराना है तीसी का इतिहास – तीसी का इतिहास हजारों साल पुराना है। कहा जाता है कि 10 हजार साल पहले मेसोपोटामिया की सभ्यता ने इसका इस्तेमाल शुरू किया। आज विश्व में कनाडा में सबसे ज्यादा तीसी उपजाया जाता है। भारत की तीसी उत्पादन में मात्र 9 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

तीसी किस तरह खाएं?

मेरे पिछले आर्टिकल ने तीसी पर लोगों में जबरदस्त रुचि पैदा की है। मुझे सैकड़ों पाठकों ने फोन किये। उनका मुख्य प्रश्न तीशी खाने के तरीके पर है। इस मामले में मैंने उपलब्ध शोधों को पढ़ा है। उनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि सदियों से भारत ग्रामीण इलाकों में जिस तरह से तीसी खायी जाती है, वह वैजानिक है। यानी ताजे तीसी को हल्का भून लें और उसे पीस कर उसको क्रश कर दें।

क्रश की हुई तीसी को कुछ दिनों तक ही स्टोर करें। यदि आप पूरी तीसी खाते हैं, तो यह बिना पचे ही मल से निकल जाता है। भूरे रंग की या गोल्डेन रंग की तीसी विश्व में पायी जाती है। दोनों के फायदे एक ही हैं। कई देशों में तीसी को पाउडर बना कर और आकर्षक पैकिंग में डाल कर बेचा जा रहा है। अगर आप पूरी तीसी खाना चाहते हैं तो पहले खूब चबा लीजिए। यह जानना भी जरूरी है कि तीसी को यदि बहुत ज्यादा आंच में रखा जाये तो इसका पोषक तत्व खत्म हो जाता है और वह जहरीला भी हो सकता है। तीसी के तेल प्रयुक्त नही करें। तीसी खाने की शुरुआत मात्र एक चम्मच (20 ग्राम) से करें और खाने के बाद भरपूर मात्रा में पानी अवश्य पी ले अन्यथा वह कब्ज कर सकता है। क्रश की हुई यानी पीसने के बाद की तीसी को ठंडे जगह पर ही रखे और धूप से बचाएं। इसे विदेशों में लोग फ्रीज में रखते हैं। प्रतिदिन एक से दो चम्मच तीसी का ही प्रयोग करें। ज्यादा लेना सुरकित नहीं है। तीसी को सलाद में डाल कर या दही या दही में डाल कर या अन्य पकवानों पर डाल कर भी खाया जा सकता है। इस विषय पर प्रामाणिक जानकारी www.flaxcouncil.ca पर उपलब्ध है।

अंतत हेल्थ को ठीक रखना मिला-जुला प्रयत्न होता है। इसमें आपके लाइफ स्टाइल की भूमिका अहम होती है। संपूर्ण स्वास्थ्य की और तीसी का प्रयोग एक हिस्सा हो सकता है मगर केवल तीसी पर ही अपने हेल्थ को नहीं छोड़ा जा सकता। यह धरती पर पाये जाने वाले बेस्ट हेल्दी फूड की लिस्ट में काफी ऊपर है, मगर इसके प्रयोग में सावधानी की जरूरत भी काफी ज्य्दा हैप्पी तीसी यूज।

क्यों महत्वपूर्ण?

मेडिकल साइंस ने आज तीसी को कुछ काछ स्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना है।

i. यह डायबिटीज से बचाव करता है।
ii. हृदय आघात और लकवा (ब्रेन अटैक) से बचाता है।
iii. खतरनाक एलडीएल कोलेस्टराल को कम करने की कमता रखता है।

iv. ब्रेस्ट कैंसर में इसकी महत्ता बचाव और उपचार दोन में हैं। ऐसा तीसी में पाये जाने वाले लिगनैन के कारण होता है। लिगनैन फायटो-इस्टेरेजोन से भरपूर होते है। इस्टेरेजोन के मेटाबालिज्म को नियंत्रित कर तीसी ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करता है।

v. तीसी में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर होते हैं, जो ब्लड सुगर को स्थिर करने और आंतों को गति देने में फायदेमंद है।
vi. औरतों में मेनोपाज के बाद शरीर में होनेवाले हाट फ्लैशेज यानी गरमी लगने की समस्या से भी तीसी का नियंत्रित सेवन छुटकारा दिला सकता है।

vii. वैसे तीसी के फायदों को लिस्ट लंबी है। मगर इतना जानना काफी होगा कि तीसी में आमेगा-3-फैटी एसिड की मात्रा इतनी होती है कि वह हमारे शरीर में रोगा पैदा होने वाली प्रक्रिया को पूर्णत सुधार सकता है यदि शरीर में सही मात्रा में ओमेगा -3-फैटी एसिड रहेगा तो मेटाबालिक बीमारियों के होने का खतरा बहुत कम जायेगा।